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अन्तरजाल पर आपकी मासिक पत्रिका |
अन्तरजाल पर साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली वर्ष: 10, अंक 103, जनवरी द्वितीय अंक, 2016 ISSN 2292-9754 |
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लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक
रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है।
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सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्य कुंज में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के
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सम्पादक:- सुमन कुमार घई; साहित्यिक परामर्श:- डॉ. शैलजा सक्सेना; सहायता - विजय विक्रान्त; संरक्षक - महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश |
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कविता |
कहानी |
लघु-कथा |
लोक-कथा |
आपबीती |
आलेख |
हास्य-व्यंग्य |
हास्य-व्यंग्य |
हास्य/व्यंग्य कविताएँ
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सम्पादकीय: साहित्य का व्यवसाय
चाहे लेखक कितना भी कह लें कि लेखन केवल "स्वान्तः सुखाय" प्रक्रिया
है, परन्तु मैं इसे नहीं मानता। लेखक सदा पाठक या श्रोता की अपेक्षा
रखता है। सृजन प्रक्रिया अगर मानसिक सुखद व्यसन है तो दूसरी ओर इस कला
के प्रकाशन का आर्थिक बोझ दुखदायी हो सकता है.....
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| इस अंक में कहानियाँ - | ||
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रामलीला अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव |
लव एंड शादी.कॉम रिशी कटियार |
बेटियाँ हेमंत शेष |
| हास्य - व्यंग्य - | बाल साहित्य - | लघु कथा - |
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सौ साल पहले -
प्रमोद यादव सिंघम रिटर्न ५३ .... - सुशील यादव मुखर-मुखिया, मजबूर मार्गदर्शक...!! - तारकेश कुमार ओझा |
ग़लती नहीं करूँगी, बिल्ली की दुआएँ - प्रभुदयाल श्रीवास्तव |
कहानीकार - हेमंत शेष तोहफ़ा - ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ये कहाँ आ गए हम...।, फ़ैशन, तीर्थान्त - रचना गौड़ ’भारती‘ |
| आलेख शृंखला - | साहित्य और सिनेमा - | शोध निबन्ध - |
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इसी बहाने से- मित्रों, एक लम्बे अरसे से किसी बहाने से साहित्य चर्चा नहीं कर पाई। इस बीच कुछ लिखा, कुछ पढ़ा और बहुत सा सोचा... कविता, तुम क्या कहती हो!! - डॉ. शैलजा सक्सेना |
फ्रांसीसी राज्य क्रान्ति और यूरोपीय नवजागरण की अंतरकथा : ए टेल ऑफ़ टू सिटीज़ डॉ. एम वेंकटेश्वर |
भारतीय साहित्य में अनूदित साहित्य का महत्व और कन्नड़ का अनूदित "हयवद्न" नाटक का विशेष अभ्यास - पिनल पढियार धर्म का मौलिक स्वरूप - रामकेश्वर तिवारी जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ- वर्तमान परिप्रेक्ष्य - रहीम मियाँ |
| नाटक - | साक्षात्कार - | अनूदित साहित्य |
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ज़हर का पौधा डॉ. कन्हैया त्रिपाठी |
नुक्कड़ नाटक की अध्येता और आलोचक डॉ. प्रज्ञा से बातचीत मोनिका नांदल |
एक राजनैतिक कहानी तेलुगु मूल : "ओका राजकीय कथा" लेखिका : वोल्गा हिन्दी अनुवाद: प्रो. एम. वेंकटेश्वर |
| कविताएँ - | शायरी - | |
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शहर,
वो औरत,
गुमनामी,
दीवाली
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डॉ. विक्रम सिंह ठाकुर शिकायत सब से है लेकिन, नए साल से कह दो कि, चाय का कप - डॉ. मनीषकुमार सी. मिश्रा हँसना झूठी बातों पर, तेरा चेहरा नज़र आये - मनोज यादव |
आम आदमी का सामान्य ज्ञान,
बेटियाँ,
फिर से कुएँ पर जा-जा कर,
याद -
जयप्रकाश मानस मेरे मार्गदर्शक - पिता और शब्दकोश, पत्थर तोड़ती औरत - मनोज चौहान वही तो रक्त है, त्राहि-त्राहि मची हो, ओ मातृभूमि तेरी जय होये - उपेन्द्र परवाज़ |
इक कहानी तुम्हें मैं..,
सूरत बदल गई कभी,
बिना तेल के दीप जलता नहीं है -
संजय कुमार गिरि वो इश्क के क़िस्से, अपने पास न रखो, तेरे इंतज़ार में, थककर चूर, तेरे आगोश में - अमित राज ‘अमित’ दिल मिरा ये सोचकर हैरान है, हम क्या बताएँ कैसे, और क्या था - अनिरुद्ध सिंह सेंगर |
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