पिछले दिनों संसद के
गलियारे में एकाएक पी.एम. ने जब शहजादे को खड़े देखा तो वे उनकी ओर बढे और बेहद ही गर्मजोशी के साथ उनसे हाथ मिलाया. शहजादे
ने भी उसी शिद्दत से हाथ मिलाया.दोनों देर तक हाथों को झुलाते रहे. पी.एम..के
होठों पर लम्बी मुस्कान खिंची थी तो शहजादे ने भी कोशिश करके उनसे भी दूगुनी
मुस्कान बिखेरी थी .. दो ही क्षण में आँखों ही आँखों में उन्होंने कई बातें कर
डाली. आँखों की भाषा का हिंदी अनुवाद कुछ यूं है –
‘ देखा शहजादे...हम
कहते न थे-हमारी सरकार बनेगी..पी.एम.की कुर्सी पर हम ही विराजमान होंगे..तुमने तो
इसे मजाक ही समझा होगा ..अब बोलो..?’
‘अब क्या बोलूंजी..’
उसने राजकपूर वाले अंदाज में कहा- ‘ मैं तो अपनी ही पार्टी में मजाक बन गया हूँ.
जोकर बन गया हूँ...हमारे खेमे में एक से एक सुपर-डुपर धुरंधर नेता और मंत्री थे
इसलिए डूबने की बात तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था..’
पी.एम. ने बीच में
बात काट दी –‘ नहीं शहजादे..वे धुरंधर नहीं-नंबर एक के घोटालेबाज थे..आस्तीन के
सांप थे...तुम्हारे पी.एम. भर समझदार थे..उन्होंने पहले ही कुर्सी का मोह त्याग
हमें “वाकोवर” दे दिया..अब देखो- मेरे पास पी.एम.की कुर्सी है...सेवन रेसकोर्स का बंगला
है.. मंत्रालय है..दरबारी मंत्री है..नौकरशाह है..एस.पी.जी. है..तुम्हारे पास क्या
है ? ‘
शहजादे ने भोलेपन से
कहा- ‘ मेरे पास माँ है...’
‘ तो अब अपनी माँ को
लेकर चार-पांच साल की छुट्टियाँ मना आओ बरखुरदार..ननिहाल हो आओ.. मन बहल जाएगा..तब
तक मैं देशवाशियों के लिए “अच्छे दिनों” की व्यवस्था करता हूँ.. अरे हाँ....माँ से याद आया कि मुझे भी माँ के पास जाना
है..पडोसी पी.एम. ने उनके लिए सिल्क की साडी भेजी है,उसे देने हैं ..अच्छा तो हम चलते हैं..’
शहजादे ने नहीं पूछा
कि फिर कब मिलोगे ? दोनों पीठ मोड़ अपने-अपने रास्ते निकल गये.
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प्रमोद यादव
गया नगर , दुर्ग, छत्तीसगढ़

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