Monday, 8 October 2012


"थैंक यू प्रभू"  
 
एक शहर मे एक बहुत ही काली - कलूटी कुरूप लड़की अपनी दो गोरी-गोरी बहनो माता-पिता के साथ रहती थी. अपनी कुरूपता से इस कदर दुखी रहती कि दर्पण देखने का साहस भी ना जुटा पाती..राह चलते लोग उसे देख ऐसी मुँह बनाते  
जैसे उन्होने कोई घृणित चीज़ देख लिया हो.. घरवाले तो कुछ नही कहते पर बाहरवालो की टिप्पणी और उपेक्षा से वह  
जार-जार रोती. प्रभू के आगे घंटो आँसू बहाती. एक दिन प्रभू उसकी व्यथा से व्यथित हो प्रगट हुए, बोले-बच्ची,क्यो इतना दुखी होती हो? तुम्हारी समस्या से मैं वाकिफ़ हूँ..हर समस्या का समाधान भी होता है..तुमने कभी समाधान की कोशिश की?  
"क्या कोशिश नही की प्रभू...फेयर एंड लवली,पांड्स, इमामी क्रीम..सबने धोका दिया..मेरे माता-पिता इतने धनी भी नही की माइकल जेक्शन की तरह मेरी प्लास्टिक सर्जरी करवा सके.."  
"अरे पगली इसमे धन की क्या ज़रूरत? तुम तो मात्र पच्चीस रुपये मे इस समस्या से छुटकारा पा सकती हो...अभी और इसी वक्त"  
"कैसे प्रभू?"लड़की विस्मित हुई.  
"बाजार जाओ और एक सुंदर-सा दुपट्टा ख़रीदो..उसे सर से लेकर गले के नीचे तक ऐसे लपेटो कि केवल दीदे भर दिखाई दे..लगे तो उस पर भी चश्मे चढ़ा लो और फ़र्राटे के साथ स्कूटी या सायकल पर उड़ो...तुम पर ना कोई टिप्पणी करेगा ना ही तुम्हारी उपेक्षा...उल्टे लोग तुम्हारे पीछे भागेंगे...जाओ, समय मत गवाओ..मैं साल भर बाद तुमसे मिलूँगा.."  
साल भर बाद प्रभू प्रगट हुए,पूछा-"क्या हाल है बच्ची?"  
लड़की खुशी से चहककर बोली-"बहुत खुश हूँ प्रभू..शुरू-शुरू मे दिक्कते आई..लोग अचंभे से देखते और पूछते..मैं एक ही जवाब देती-प्रदूषण से बचने मुँह बाँधती हूँ..पर अब कोई कुछ नही कहता..अब तो यह सजगता शत-प्रतिशत लड़कियो के सर पर सवार है...अब मैं अकेली ही(कुरूप) नही, शहर की सारी लड़किया मेरे साथ(कुरूप)हैं, सबको नकाब मे देखती हूँ तो बेहद खुशी होती है, हम सब मे एकरूपता जो गई..थैंक यू प्रभू..यू आर ग्रेट..थैंक यू.."  
* प्रमोद यादव  
गयनागर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)  
मोबाइल-०९९९३०३९४७५  
 
 
 
 

No comments:

Post a Comment